Sudheer Maurya & his Creation World…

टैग पुरालेख: रिंकल

देवल देवी: एक  संघर्षगाथा,  मेरा ऐतिहासिक उपन्यास  जिसे मैने समर्पित किया है पाकिस्तान की  लड़की रिंकल कुमारी को। सनद रहे २४ फरवरी २०१२ को रिंकल को अगुवा करके उसका  रेप करके उसका जबरन धर्म परिवर्तन किया गया। बाद में उसका निकाह उसके ही अपहरणकर्ता के साथ कर दिया गया। रिंकल ने बहादुरी के साथ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक आवाज़ उठाई पर कट्टरपंथियों के  देश में उसकी एक न सुनी गई और  भी अपने अपहरणकर्ताओ के चंगुल में है। ठीक ऐसी ही  कहानी  आज  से आठ सौ साल पहले  राजकुमारी देवलदेवी के साथ हुई थी पर देवल देवी ने अपनी कूटनीति से अपने अपहरणकर्ताओ के वंश का नाश कर दिया। मैने इस उपन्यास में इसी स्फूर्तिदायक कहानी का उल्लेख किया है। —सुधीर मौर्य            Deval Devi by Sudheer Maurya

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Sudheer Maurya

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कल 24 फ़रवरी को गरीब लड़की रिंकल को कैदी का जीवन बिताते हुए एक साल पूरा हो जायेगा। वो अब तक कैदी है, वो आज़ाद होगी भी या नहीं, मालूम नहीं। हम उसके लिए शायद बहुत कुछ कर न पाए, उसकी आज़ादी के लिए पुरे प्रयास हम न कर सके सो अगर वो कैदी है तो उसे कैद करने वालो के साथ – साथ कुछ दोषी तो हम भी हैं। उसकी आज़ादी के वास्ते जिस सपोर्ट की दरकार थी वो हुआ नहीं।
फेक्ट्री, आफिस, काम, मनोरंजन और फेसबुक और ऐसी ही गत्विधियों में मेरा विगत एक साल केसे निकल गया पता ही नहीं चला। बहुत से लोग एसे भी हैं जिन्होंने अपने दिन फाइव स्टार होटल की चकाचौंध और रातें हाथ में व्हिस्की का गिलास पकडे नाईट क्लब में गुजारी होंगी।
– ये है हमारी विकसित होती सभ्यता और व्यवस्था की बानगी।
– पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस विकसित होती व्यवस्था में पराधीन हैं, गुलाम हैं। उन पर पाबन्दी लगा दी गई है। अब वो अपनी मर्ज़ी से   सांस भी नहीं ले सकते, हवा अब उनके बदन को छु नहीं सकती, सितारों की रौशनी उनके छत पे आकर उनके सर पर आशीष नहीं दे सकती। अब वो अपनी माँ की गोद में सर रख के सो नहीं सकते,अब वो अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध सकते।
– क्यों ? क्योंकि अब वो पराधीन हैं, कैद में हैं।
– रिंकल कुमारी – मस्ती से पार्टी में झूमते हुए लोगो, देश के कर्णधारों, मानवाधिकार संगठनो के सड़े हुए अध्क्षो तुम सब इस एक लड़की के दर्द का अनुमान क्या लगा सकते हो। जो गुज़रे एक साल से एक प्राइवेट जेल में बंद है। जिसके बदन की नीलामी उसे कैद करने वाले रात – दिन कर रहे हैं। जिसका हर तीसरे महीने अबार्शन काराया  है जाता है, ताकि उसे सेक्स के लिए तैयार रखा जा सके।
तसलीमा नसरीन के उस बयां पर जिसमे वो कहती है उनका योन शोषढ हुआ पूरा मीडिया और सभ्य समाज उनके लिए आवाज़ उठता है, पर इस लड़की के लिए नहीं क्योंकि वो अपने देश में एक गरीब अल्पसंखक है। रिंकल को तसलीमा से भी बहुत उम्मीदे होंगी की वो उस मासूम के लिए आवाज़ जरुर उठाय्न्गी। मुझे भी तसलीमा नसरीन से बहुत उम्मीद है की वो उस लड़की की आज़ादी के लिए आगे आयंगी।
सुन्दर जवान लडकियों को हवस के लिए इस्तेमाल करने का खेल सिंध में सन सात सौ बारह से चालु है। यहाँ की भोली – भली मासूम लडकियों को अगुवा करके उनका योंन शोषढ़ निरंतर जारी है। मनीषा, मूमल रिंकल, विज्यन्ति, आशा और लता न जाने कितनी मासूम इस फ़ेअरिस्त में शामिल हैं जिन्हें जबरन सेक्स स्लेवरी के लिए मजबूर किया गया।
में भारत के माननीय प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति से अपील करता हु की वो इस मासूम को रिहाई के लिए कोई ठोस कदम उठाये। में आज की चर्चित लेखिकायं मनीषा कुलश्रेष्ठ, तसलीमा नसरीन, अरुंधती रे और सुधा मूर्ति से भी अपील करता हूँ की वो इस लड़की के लिए कुछ तो करे आखिर वो भी उन्की तरह एक स्त्री जाति से है।
ऐ रिंकल तेरी उम्मीदों ने अभी दम नहीं तोडा है, तेरी रिहाई के लिए असद चंडियो, राज कुमार, वेंगस, मारवी सरमद, सुनील दिक्षित, राकेश लखानी जैसे लोग निरंतर संघर्ष कर रहे है और यही हमारी उम्मीद है।
तू हौसला रख रिंकल तेरी रिहाई होगी – जरुर होगी।
सुधीर मौर्य ‘सुधीर’
गंज जलालाबाद, उन्नाव
209869

Sudheer Maurya

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Miya Mitthu (2nd Yazeed)

कभी मेने सआदत हसन मंटो कि एक कहानी पड़ी थी ‘यजीद’ जिसमे मंटो यजीद की खोज करते दिखाई पड़ते है। बेचारे यजीद के रूप में सही पात्र न पाकर कहानी को खीचते रहते है। कभी भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री नेहरु में  उन्हें यजीद दिखाई पड़ता है कभी किसी में। आखिर में तंग आकर मंटो अपने पैदा होने वाले बच्चे का नाम यजीद रखकर कहानी से छुटकारा पाते हे।

आज अगर मंटो ये कहानी लिखते तो उन्हें यजीद की खोज नहीं करनी पड़ती, वो आसानी से इसे ढूंड  लेते। हाँ रिंकल को  तड़पाने वाला कोई यजीद ही हो सकता है। मिया मिट्ठू यकीनन मंटो का यजीद है। यजीद ने तो कर्बला में सिर्फ पानी के लिए तडपाया था पर ये मिया मिट्ठू तो बेचारी लड़कियों को एक – एक सांस के लिए तडपा रहा है। न जाने कितनी मजलूम नाबालिग लड़कियां इसकी कैद में सिसक रही हे। उनके साथ बर्बरता का सलूक किया जा रहा है। मिया मिट्ठू को उसके इन पापो के लिए खुदा कभी मुआफ़ नहीं करगा।

 

सुधीर मौर्य ‘सुधीर’

गंज जलालाबाद , उन्नाव

209869

 


Sudheer Maurya ‘Sudheer’

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संसार का निर्माण होते ही शायद स्त्रियों को पुरषों का गुलाम समझा जाने लगा।एक ही स्थान से, एक ही प्रक्रिया से पैदा होने के बावजूद उन्हें कभी भी पुरषों के समकक्ष स्थान  प्राप्त न हो सका।
भारतीय संस्क्रीत में स्त्रियों को माँ , बहन और बेटी के रूप में पूजनीय माना गया है। पर  पत्नी के रूप उसे कभी भी पुरषों ने अपने बराबर नही स्वीकारा। पुरषों में बहुपत्नी रखने का चलन रहा और उनकी कई पत्निया के साथ – साथ कई – कई रखेले भी होती थी। सामन्ती पुरष पराई स्त्रियों का हरण करके उनका बलात्कार करते और फिर उन्हें अपने रनिवास योनि सुख की प्राप्ति के लिए रख लेते। भारत में मुस्लिम आकर्मण के साथ ही स्त्रियों और लडकियों के अपहरण और उन्हें रखेल बनाने के आंकड़े में बहुत तेजी से इजाफा हुआ।
स्त्र्यियो को पुब्लिक प्लेस पर भी काफी समय पहले से अपमानित किया जाता रहा है। द्रौपदी इसका ज्वलंत उदहारण है। ये बात अलग है वो अपने एक मित्र कृष्ण की मदद से बच  गई। वरना पुब्लिक प्लेस पर अपने परिवार के तमाम लोगो की मौजूदगी में ही उसका सामूहिक बलात्कार होना तय था। हा ये बात अलग है की बाद में द्रौपदी के परिवार वालो ने उसके अपमान का बदला कुरुक्षेत्र की ज़मीन को लाल करके लिया।
लगभग द्रौपदी के काल में ही, उससे कुछ वर्ष पहले ही अम्बा नाम की एक राजकुमारी का भी अपहरण करके उसे अपमानित किया गया। उसका बलात्कार तो नहीं हुआ पर जबरन अपहरण की पीड़ा वो सारी उम्र झेलती रही। इस जबरन अपहरण की वजह से उसका पुरुष मित्र उसे छोर कर चला गया।
इन सब घटनाओं से पहले सीता के अपहरण की घटना तो सबको ज्ञात ही है। उन्हें भी इस जबरन अपहरण का दंश सारी उम्र झेलना पडा और वो कभी भी सुखी जीवन न जी सकी।
जेसा की ऊपर मेने लिखा की भारत में मुस्लिम आकर्मण के साथ ही लडकियों के अपहरण में बड़ी तेजी आई। मुस्लिम लोगो को दुसरे की स्त्रियों और क्वारी लडकियों को अपनी पत्नी या रखेल बनाने में एक विशेष सुख हासिल होता था। अल्लुद्दीन ने गुजरात की रानी कमला देवी और वह की राजकुमारी देवल देवी को जबरन अपने हरम में रखा। और उन्हें योनि दासी के रूप में भोगा। ये बात अलग है की राजकुमारी देवल देवी ने कुछ समय बाद ही अपने इस अपमान का बदला अल्लुद्दीन के सरे परिवार को ख़त्म करके ले लिया। चित्तोड़ की रानी पद्मनी को अलाउद्दीन के हाथो अपहरण होने से बचने के लिए आत्महत्या करनी पड़ी।
 अकबर ने अपने और अपने शहजादों के लिए हिन्दू पत्निया संधि में प्राप्त की पर कभी भी अपने घर की किसी लड़की की शादी उसने किसी हिन्दू राजकुमार से नहीं की। ये बात अलग है की कुछ समय बाद इस मुगुल खानदान की शहजादियो की अस्मत, अफगान आक्र्मंकारियो और अंग्रेजो ने तार – तार कर दी।
आज हम कहने को सभ्य समाज में जी रहे है पर पिछले साल पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में हुए एक हिन्दू लड़की रिंकल कुमारी के जबरन अपहरण ने हमे हिला के रख  दिया। रिंकल चीख –  चीख के अपने माँ – बाप के सतह जाने की गुहार लगाती रही पर उसकी आवाज़ को जबरन दबा दिया गया। वो आज भी एक योनि दासी का दंस झेल रही है। और न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। पर क्या पुरुष प्रधान संसार में ये मुमकिन है। और फिर उस जगह जहाँ शिक्षा के लिए आवाज़  उठाने के लिए मलाला युसुफजई को सरफिरे गोली मार देते है।
लडकियों के जबरन अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन, जबरन विवाह और भोग की वस्तु से बचाने के लिए एक विश्व्यापी सार्थक पहल की जरुरत है। ये पहल कोन  करेगा ? शायद हम लोग। पर जल्दी। कही बहुत देर न हो जाये।
सुधीर ‘मौर्य सुधीर’
गंज जलालाबाद उन्नाव
209869

Sudheer Maurya ‘Sudheer’

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कल फेसबुक पर मेरे एक दोस्त ने पूछा रिंकल का क्या हुआ, में क्या जवाब देता। शायद मेरे पास कोई जवाब था ही नहीं, सच पूछो तो पिछले दो महीनो से किसी को भी नहीं मालूम रिंकल के साथ क्या हुआ। दिवाली के अगले दिन रिंकल ने अपनी माँ को फोन पर  अपनी दुर्दशा के बारे में बताया था, उसने रो – रो के कहा था वो अब और सहन नहीं कर सकती। रिंकल ने कहा अब तक उसका तीन बार गर्भपात कराया जा चूका है।  सच केसी है ये विडंबना एक हँसती – खेलती मासूम सी लड़की पिछले आठ महीनो से लगातार बलात्कार का दंश झेल रही है और तथाकथित सभ्य समाज के रहनुमा कानो में तेल डाळ के बेठें है।
कैसे एक माँ  ने सुना होगा की उसकी मासूम लड़की जिसका बचपन अभी तक गुजरा न था वो लगातार बलात्कार और इस के फलस्वरूप हर 2 -3 महीने बाद गर्भपात के दौर से गुज़र  रही है, क्या गुजरी होगी एक माँ के  दिल पे अपनी बच्ची का ये हाल उसकी ही जुबानी सुन के।यकीन उस माँ का कलेजा फट गया होगा।
हम बताते चले की पिछले साल फ़रवरी में रिंकल का उसके घर से आपहरण हो गया था और उस बेचारी का जबरन एक ठग के साथ निकाह कर दिया गया था।  तब से लेकर आज तक वो उस ठग और उसके सहयोगियों की वासना पूर्ति का साधन बनी हुई है।
एक तरफ हम सभ्य होने का दम भर रहे है दूसरी तरफ एक मासूम लड़की को ठगों के चंगुल से आज़ाद नहीं करा पा रहे। जबकि भारत और अमेरिका जेसे प्रजातंत्र देशो के मुखियाओ के संतान के रूप में सिर्फ लड़कियां है फिर भी ये एक गरीब मासूम लड़की का दर्द समाज पाने में असमर्थ हैं।
रिंकल के दर्द को समाज पाना अब इतना आसान भी नहीं है वो दर्द की मूर्ति बन चुकी है। मीरपुर मेठेलो की वो हवेली जिसमे उसे जबरन (पकिस्तान सरकार की मर्ज़ी से) से कैद करके रखा गया है उस हवेली की फसील से लेके एक – एक कोना उस मासूम पर हो रहे जुल्म का गवाह है।
में इल्तिजा करता हूँ देश के रहनुमाओ( भारत, पाकिस्तान,united nation के ) से वो एकबार इस लड़की से मिले इसके दर्द को समझे और अगर उन्हें लगे ये भी उनकी बच्ची की तरह है तो कृपया इसे जुल्म की भट्टी से आज़ाद कराये और न्याय की देवी को कलंकित होने से बचा ले।
सुधीर मौर्य ‘सुधीर’
गंज जलालाबाद , उन्नाव
209869


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