Sudheer Maurya & his Creation World…

 

जबरन धर्म परिवर्तन और रिंकल कुमारी
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पिछले 8 महीनो में रिंकल कुमारी के जबरन धर्म परिवर्तन की खबरे पाकिस्तान विशेष रूप से सिंध के मीडिया में लगातार आती रही हे पर पाकिस्तान में हो रहे जबरन धर्म परिवर्तन पर भारत का मीडिया और राजनेतिक लोग बिलकुल उदासीन रहे हैं। कारण यदि सरहद पार का है तो में यही कहूँगा सरदे बाँट लेने से इंसानों को लगने वाली चोट की तासीर नहीं बदल जात।

अभी
कुछ दिन पहले पंजाब के एक मंत्री ने लाहौर से अपनी बहन के गुम हो जाने का विरोध पकिस्तान में दर्ज कराया। यदि वो अपनी अप्रवासी बहन (शायद कनाडा में रहती हे) के बारे में बात कर सकते हैं तो रिंकल के बारे में क्यों नहीं। शायद इसलिए की वो उनकी रिश्तेदार नहीं है।

आइये जानते हैं ये रिंकल कुमारी है कोन ?

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के मीरपुर मेठेलो की रिंकल कुमारी का 24 फ़रवरी 2012 को उसके घर से अपहरण कर लिया गया। ठीक उसी दिन उसे जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया और दिन ढलते-ढलते उसे जबरन एक मुस्लिम लड़के की बीवी बना दिया गया। रिंकल अपने माँ-बाप के पास जाना चाहती थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। सुनवाई के दोरान रिंकल ने रो-रो के माँ के साथ रहने की गुहार लगे। पर वकील के ये कहने पर लड़की ने कलमा पद लिया है उसे नारी निकेतन भेज दिया गया। रिंकल के विरोध करने पर पुलिस उसे घसीटते हुए ले गई।

रिंकल ने बख्तरबंद गाडी में चदते हुए अपने वकील अमरलाल से दर्द बरी आवाज़ में कहा – आप लोग मुझे बचा नहीं पाए , अब में क्या करू या तो अपने को कुर्बान कर दू या अपने घर वालो को कुर्बान कर दू। रिंकल का ये बयान काफी मायने रखता है।

नारी निकेतन में रिंकल से मिलने गई हिन्दू काउन्सिल की मंगला शर्मा को रिंकल ने उस पर हो तहे आत्याचार के बारे में बताया। जिससे रिंकल के दर्द और मज़बूरी का अंदाजा लगाया जा सकता है। रिंकल ने मंगला शर्मा से कहा उसे शायद पाकिस्तान में न्याय नहीं मिलेगा। रिंकल का ये अंदेशा में सच साबित हुआ।

आइये देखते हैं किस तरह रिंकल के मामले में न्याय की देवी सोती रही।

1: 24 फ़रवरी 2012 को रिंकल का अपहरण उसके घर से नवेद शाह और उसके गन मेन ने किया।

2: उसे जबरन बरचुन्दी शरीफ ले जाया गया जहा ppa MNA मिया अब्दुल हक (मिया मिट्टू ने उसे जबरन इस्लाम काबुल करवाया।

3: 25 फ़रवरी 2012 को रिंकल के रिश्त्व्दारो ने केश दर्ज किया।

4: कोर्ट में रिंकल ने कहा उसे बुरी तरह से मारा पीटा गया और इस्लाम काबुल न करने पर उसके परिवार को जान से मरने की धमकी दी गई।

5: रिंकल के इस बयां के बाद भी की वो अपने माँ-बाप के जाना चाहती है, जज हसन अली ने MNA मिया मिट्ठो के दबाव में सुनवाई अगली तारिक पर मुल्तवी कर दी।

6: 27 फ़रवरी 2012 तक पीडिता रिंकल कुमारी को पुलिस कस्टडी में रखा गया जहा उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ। 27 फ़रवरी को रिंकल को मिया मिट्ठू के गन मेन की कस्दी में कोर्ट लाया गया। किसी भी हिन्दू को मिया मिट्ठू के गन मेनो ने अन्दर नहीं जाने दिया। जज सामी-उल- कुरैशी ने रिंकल के बयां की परवाह न करते हुए फैसला नवेद शाह के हक में सुनाया। उस वक़्त कोर्ट में रिंकल का कोई भी रिश्तेदार मौजूद नहीं था।

7: आल हिन्दू काउन्सिल की अर्जी पर 12 मार्च 2012 सिंध हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए रिंकल को दारुल-अमन भेज दिया।

8: 26 मार्च 2012 को रिंकल कुमारी ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस इफ्तिकार चौधरी के सामने ब्यान दिया उसे दारुल-अमन न भेजा जाये। रिंकल ने कहा इसके बदले वो मरना पसंद करेगी। रिंकल ने कहा आप दारुल-अमन में एक रात गुजरने की कल्पना भी नहीं कर सकते। पर जज ने उसे वापस कराची शेल्टर हॉउस में भेज दिया।

9: 26 मार्च से 18 अप्रैल 2012 तक दारुल-अमन में रिंकल पर भयंकर आत्याचार हुए। उसके साथ कई बार रैप किया गया।

10: 18 अप्रैल 2012 को जज ने रिंकल की बात को अनसुना करते हुए उसे जबरन नवेद शाह के साथ भेज दिया।

तब से लेकर अब तक रिंकल कुमारी मिया मिट्ठू की प्राईवेट जेल में केद हे। और निरंतर यातना को बोग रही है।

धर्म परिवर्तन एक अलग मुद्दा है। पर क्या इक्कीसवी सदी में किसी इन्सान को इस तरह गुलाम / दास बनाना जायज है। हाँ रिंकल मिया मिट्ठू की हवेली में SLAVE है एक SEX SLAVE .

क्या हमारा दायित्वा कुछ नहीं। क्या हम अब भी मध्य युग में जी रहे हैं। ये एक यक्ष सवाल है जो रिंकल के केस ने उठाया है।

सुधीर मौर्य ‘सुधीर’

अभियंता और स्वतंत्र लेखन

ग्राम और पोस्ट – गंज जलालाबाद

जनपद- उन्नाव , 209869

sudheermaurya1979@rediffmail.com

Sudheer Maurya

 

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कही दीप जले कहीं दिल…

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सुधीर मौर्य ‘सुधीर’
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हाँ दिवाली तो आ गई चारो तरफ खुशियाँ, दीपमालाएं पटाखों के शोर. हर कोई उल्लासित नज़र आ रहा है, हो भी क्यों नए पर्व है ही इस के लिए. पर इन सब खुशियोंओ को मानाने का हक किसी से चीन लिया गया है क्योंकि वो मज्बूर है, गरीब है, एक लड़की है और इस से भी कहीं ज्यादा शायद वो वहां पैदा हुई जहाँ अलाप्संख्य्खों की  आवाज़ सुनी नहीं जाती. हाँ में बात कर रहा हूँ रिंकल की, उस मजलूम की जिस से उसकी खुशिया सरेआम छीन ली गई. और उसे भेज दिया गया एक इसे कैदखाने में जहाँ से उसकी रिहाई अब तक न हो सकी. रिंकल मजबूर हे मियां मित्ठो की जेल में वो तमाम यातनाये भोगने केलिए जिनके बारे में सिर्फ सुन कर ही हमें पसीना आ जाता है, दिल दहल जाता है. क्या उसके लिए हमारा कोई उत्तर्दयित्वा नहीं,क्या हम उसके बारे में आवाज़ भी नहीं उठा सकते. क्या हमारी दिवाली तब सार्थक है जब की एक मजलूम को जबरन कैद करके उसे शारीरिक और मानसिक यातनाये लगातार दी जा रही हैं.  इन यात्नायो में किसी लड़की के लिए सबसे बुरियातना sexual एब्यूज भी शामिल है.
में आप सब से आवाहन करता हु आओ हम सब मिलकर आवाज़ बुलंद करे इस गरीब और मजबूर लड़की के लिए.मैंने सुना हे की कलम में बहुत ताक़त होती है. तो फिर आओ सब मिल कर एक एसा आन्दोलन खड़ा करे जिसके तूफ़ान से मीरपुर मेठेलो की उस हवेली की दीवारे भरभरा के गिर पड़े और हम उस मजलूम रिंकल कुमारी को आज़ाद होते हुए देख सके.

बलात धर्मपरिवर्तन- देवलदेवी और रिंकल कुमारी

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कोई सात सो साल के अंतराल पर घटी दो घटनाएं. एक सात सो साल पहले तब जब भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश एक हुआ करते थे, और तो और कुछ भाग तब हमारे अधिकार में अफगानिस्तान का भी रहा करता था. शायद हमारे अधिकार में नहीं वस्तुता : उनके अधिकार में जो शासक थे. उस वक़्त हम पर शाशन करने वाला सुल्तान था अलाउद्दीन खिलज़ी. जिसे अपने हरम में स्त्रियों की संख्या बढाने में अद्भुत आनंद आता था. इसी उद्देश्य के लिए वो भारत के विभिन्न हिस्सों में भटकता फिरा. चाहे वो राजस्थान का चित्तोर हो या फिर गुजरात का पाटन.

यहाँ कुछ इतिहासकार मेरे से असहमत हो सकते हैं, की  अल्लाउदीन ने सिर्फ वासना पूर्ति के लिए ये युद्ध नहीं किये. में इस तर्क से पूरी तरह से सहमत हु. वास्तव में उस सुल्तान में योनी सुख के साथ-साथ धन और साम्राज्य की भी लालसा थी. हा एक बात ओर है , उसका प्रन्शंश्क न होते हुए भी में ये कहूँगा की वो एक महान सेनानायक था.

पर में सिर्फ उसके नारी देह के सुख के लिए किये गए आताचार के विरुद्ध इस वक़्त इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि इस के परिणामस्वरूप न जाने कितनी लड़कियों को नरक की यातना झेलनी पड़ी.जिसमे  उनका सिर्फ इतना कसूर था की वो जन्म से लड़की थी. उन्हें खिलोने की तरह एक बिस्तर से दुसरे बिस्तर पर धकेला गया. संधियों के वक़्त उन्हें दुश्मनों के आगे भी परोसा गया. ये सब इसलिए उन्हें सहना पड़ा क्योंकि वो स्त्रिया थी. सो उन्हें पुरुष वर्ग की महत्वाकांक्ष की भेंट तो चड़ना ही था.

अब कुछ चर्चा करेंगे गुजरात की राजकुमारी देवलदेवी और सिंध की फूल सी लड़की रिंकल कुमारी के दुर्भाग्य पर.

दोनों के वक़्त के बीच लगभग ७०० साल का फासला है पर ये फासला किसी भी तरह से लड़कियों पर हो रहे आत्याचार और उन्हें योनी-दासियाँ बनाने से न रोक सका है. आज भी उन्हें कभी गरीबी के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर अगुवा कर लिया जाता है और फिर उनका जबरन धर्मपरिवर्तन करके झोंक दिया जाता है बिस्तर पर बनी नरक की भट्टियों में.

* गुजरात से अपने राज्य और अपनी बीवी दोनों को गवाने के बाद जब रजा कर्णदेव बग्लाना में रूककर अपनी अल्पायु पुत्री के विवाह का प्रबंध देवगिरी के राजकुमार शंकरदेव के साथ कर रहा था तब तुर्क सेना ने अचानक धावा बोलकर देवलदेवी का अपहरण कर लिया और उसे तुरंत देल्ही भेज दिया जहाँ उसका जबरन धर्म परिवर्तन करके उसकी इच्छा के विरुद्ध एक नशेडी शहजादे के साथ रहने और उसकी योनी – दाशी बनने को मजबूर कर दिया गया.

* सिंध के एक शहर मीरपुर में रहने वाली एक मासूम लड़की रिंकल जो उस वक़्त अपने भाई की होने वाली शादी की तय्यारिओं में खुश थी, अचानक एक सुबह मियां मिठो और उसके गुंडों ने उस बेचारी का अपहरण कर लिया. उसी दिन उसका जबरन धर्मपरिवर्तन करके उसे एक मुस्लिम लड़के नवेद शाह की योनी – दासी बना दिया गया, ये बात अलग है की उस वक़्त बेचारी रिंकल रो-रो कर इसका पुरजोर विरोध करती रही.

* देवलदेवी हर तरह से मिन्नत की पर उसकी एक न सुनी गई और देल्ली सल्तनत ने उसे हरम में रहने पर मजबूर कर दिया.

* रिंकल ने हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चिल्ला-चिल्ला के अपनी माँ के पास रहने का अनुरोध किया पर सो रही न्याय की देवी ने उसे मियां मिथ्ठो के बनाये  हरम में भेज दिया.

* देवल देवी के फर्जी पति खिज्र खान ने  तब के लेखक को धन दौलत और राजकीय हुक्म देकर अपनी और देवलदेवी की झूटी प्रेमकहानी ‘आशिका’ लिखवाई.

* रिंकल के अपहरंकर्तावं नेकुछ मीडिया वालो के सामने रिंकल को उसके माँ-बाप को जान से मर डालने  की धमकी देकर उससे झूठा ब्यान दिलवाया.

* देल्ही सल्तनत में हुई उथल-पुथल के कारण मुबारक ने अपने बड़े भाई को अँधा कर के राज्य हथिया लिया साथ ही साथ उसने देवलदेवी को भी अपनी रखेल बनने के लिए मजबूर कर दिया.

* यकीनन (खुदा न करे) मिया मिथ्ठो के हरम में रिंकल के साथ भी एसा ही हो रहा  होगा.

वक़्त ने फासला जरूर तय कर लिया है पर लड्कियो को  अपने सुख का साधन अब भी समझा जाता है. उनके दर्द के बारे में कोई नहीं सोचता. उन्हें इस धर्म की वेदी पर कुर्बान कर दिया जाता है….

ये सब तब तक होता रहगा…जब तक हम सोते रहंगे…

सुधीर मौर्य ‘सुधीर’

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