Sudheer Maurya & his Creation World…

Pahla Shudra

पहला शूद्र एक पौराणिक फ़िक्शन उपन्यास है जो सप्त-सैंधव प्रदेश में आर्यो के प्रथम आगमन अथवा आक्रमण और अनार्यों के साथ हुए भीषण संघर्ष की कहानी है। तो वहीँ दूसरी ओर यह उपन्यास – दाशराज युद्ध का महानायक और दिवोदास पुत्र सुदास के जीवन के उतार-चढ़ाव और उसके विरुद्ध षड्यंत्र की भी कहानी है।

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Pahla Shudra … the story of the King Sudas who was a great warrior and the Hero of Aryans. He was the first Aryan who established Aryans’ Empire … but unfortunately he was trapped by his own priest who made him First Shudra.

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खूबसूरत अंजलि उर्फ़ बदसूरत लड़की की कहानी-सुधीर मौर्य

बहुत खूबसूरत थी वो लड़कपन में।

लड़कपन में तो सभी खूबसूरत होते है। क्या लड़के , क्या लड़कियां। पर वो कुछ ज्यादा ही खूबसूरत थी। वो लड़की जो थी।

लड़कियां हर हाल में लड़कों से ज्यादा खूबसूरत होती है। ये मैंने सुना था। लोगों से, कई लोगों से। कुछ माना, कुछ नहीं माना। फिर लड़कियों की लड़कों से ज्यादा खूबसूरत होने की बात कहानियों में पढ़ी। उपन्यासों में भी। बस मैंने ये ये बात मान ली कि लडकियां हम लड़कों से कहीं ज्यादा सुन्दर होती है। आखिर क्यों न मानता वो सारी कहानियां और सारे उपन्यास साहित्यकारों ने लिखे थे। साहित्यकार तो समाज के दर्पण होते है। जो होता है वही दिखाते हैं। फिर लड़कियां, लड़कों से ज्यादा खूबसूरत होती है ये बात मैं न मानूं इसकी कोई वजह न रही।

वो लड़की थी। खूबसूरत लड़की। मेरी हमउम्र या मुझसे साल – छै महीने छोटी। जब लोग बोलते देखो कितनी सुन्दर बच्ची है मैं सुनता और फिर उसे देखता, उसकी सुंदरता देखता। पर मुझे निराशा हाथ लगती। वो मुझे सुन्दर नज़र नहीं आती।

मैं भी लड़कपन में था। खेलते – खिलाते मैं अक्सर उसके घर पहुँच जाता। कभी – कभी उसके साथ उसके खेल में भागीदार हो जाता। वो हर खेल में जितना चाहती। किसी भी तरीके से।

उस दिन वो खेल , खेल रही थी। गुड्डे – गुड़ियों। उनकी शादी – ब्याह का। अचानक वो भाग कर अपनी मुम्मी के पास गई और फ्राक लहराकर बोली ‘मुम्मी – मुम्मी ये पति क्या होता है ?’

‘जो अच्छी लड़कियां होती है उन्हें बड़े होकर एक पति मिलता है।’ उसकी मुम्मी ने उसे समझाया था।

‘और जो बुरी लड़कियां होती है ?’ लड़कपन की उस सुन्दर लड़की ने अपनी मुम्मी के सामने जिज्ञासा रखी।

–माँ न जाने किस ख्याल में थी। शायद किसी बात पर गुस्सा भी। लड़कपन की उस सुन्दर लड़की पे या किसी ओर पे। तनिक गुस्से से बोली ‘जो बुरी लड़कियां होती है उन्हें तो कई मिलते है। ‘

लड़की ने सुना। न जाने क्या समझा ? और भाग कर वापस रचाने लगी गुड्डे – गुड़ियों का ब्याह।

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लड़की अचानक मुझे सुन्दर लगने लगी।

पता नहीं मैं समझदार हो गया था और मुझे सुंदरता की पहचान करने की अक़्ल आ गई थी। या फिर वो लड़की थी ही सुन्दर। अब उस लड़की के घर के आस – पास लड़के मंडराने लगे थे। जो अपनी बातों में उसे बेहद सुन्दर बताते थे। मैं सुनता और खुद की कमअक्ली के लिए खुद को कोसता की कि मैंने एक सुन्दर लड़की को सुन्दर नहीं समझा।

लड़की अब लड़कपन को जीतकर टीन एज बन चुकी थी। अब वो फ्राक कभी – कभार ही पहनती। शर्ट और स्कर्ट उसके पसंदीदा लिबास थे। इस लिबास में वो जिस गली से गुज़रती उस गली के लड़कों को न जाने कितने दिन और कितनी रात बातें करने का मसाला मिल जाता। लड़की की तिरछी नज़र और होठों पे लरज़ती हंसी उन लड़कों की बातों के मसाले में इज़ाफ़ा करती रहती रहती।

कंधे पे स्कूल बेग टाँगे वो बतख चाल से गाँव से वो निकल कर पास के कसबे के स्कूल में पढने जाने लगी थी। फूल पे भंवरे मंडराते हैं और कली भंवरों की नींद उडा देती है। अब कली खुद अपनी खुशबू पर इतरा रही थी और अपने ख्वाबों – ख्यालों में उसे तलाशती जो उसकी खुश्बू को महके और उसकी खुश्बू में सराबोर हो कर उसे भी सराबोर कर दे।

उस महकती कली की खुशबू को सबसे पहले महका था हमारे ही गांव के एक भंवरे ने। नाम प्रशांत। लड़की और लड़के मिले। बातें हुई। हाथ पकडे। कलाईयाँ थामी। चुम्बन लिए। गले मिले। पति – पत्नी बनने के कस्मे – वादे हुए। अब जब पति – पत्नी बनने की सोच ली तो फिर पति – पत्नी की तरह हक़ मांगे गए। ऊपरी मन से लड़की ने न – नुकुर की। फिर लजाते – शरमाते मान गई। कैसे न मानती उसकी बात जिसे पति बनाने का वादा किया हो। लड़की की रज़ामंदी उसकी न – नुकुर में रहती ही है ये बात शायद लड़का जनता था। कपडे उतरे। लड़की पे लड़के का रंग पड़ा और लड़की चटख कर कली से अधखिला फूल बन गई।

अधखिला फूल बनते ही उस लड़की की चाल मोरनी सी हो गई। और अधखिले फूल पे मंडराने वाले भंवरों की संख्यां भी बढ़ गई। उन्हीं में से एक भंवरे ने पहले भंवरे से मार पीट कर दी। मारपीट के वक़्त वो भंवरा कह रहा था कि अधखिले फूल ने खुद उसे निमंत्रण दिया था अपना रस पीने के लिए।

पहला भंवरा जब तक दूसरे भंवरे की बात समझ पाता अधखिला फूल गांव से चला गया अपनी बुआ के पास गोरखपुर। लोगों ने कहा लड़की पढ़ाई के लिए गई है। मैंने लोगों की बात मान ली ठीक उस तरह जैसे लड़की के सुन्दर होने की बात मान ली थी।

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लड़की को लोग ओर ज्यादा खूबसूरत कहने लगे थे। यकीनन वो सच कहते होगें। उनके पास झूठ बोलने की वजह भी कहाँ थी।

पर लड़की जानती थी वो अभी पूरी तरह खूबसूरत कहाँ। अभी तो उसकी खूबसूरती का चरम आना शेष है कहीं अधखिला फूल भी पूर्णतया सुन्दर होता है ? पूर्णतया सुन्दर होने के लिए फूल का पूर्णतया खिलना जरुरी जो है।

कमल की मोटरसाइकिल पर कमल की पीठ पर जब वो अपने वक्ष दबा कर बैठती तो उसे लगता कि अब की बसंत उसे पूरी तरह खिला कर ही मानेगा। बसंत में फूलों का खिलना तय है। सो इस अधखिले फूल की भी बारी आई।

फूल खिल चुका था। अब अगर फूल खिला है तो उसकी महक का भी बिखरना लाज़मी है। महक भी बिखरी। अब महक बिखरेगी तो शहद पीने वाले भी आएंगे। सो वो आये। फूल गुलज़ार होने लगा। महकने लगा। और खूबसूरत हो गया । ये शहद के पीने की ललक लिए लोगों ने कहा मैंने मान लिया। मेरा मानना लाज़िमी भी था।

लड़की जानती थी। उसने जानना, समझना तो तभी जान लिया था जब गुड्डे – गुड़ियों का ब्याह रचाती थी। कि केवल सुन्दर होना पर्याप्त नहीं है। सुंदरता तब तक अधूरी है जब तक उसके साथ उच्च शिक्षा का प्रमाण पत्र सगलंग्न न हो।

उच्च शिक्षा के लिए पैसा जरुरी है। और पैसा पाने के लिए उसके पास उसका गठीला – गुदाज़ जिस्म और मोहक मुस्कान उसके साथ थी। लड़की ने कोशिश की। और कहते हैं भगवान भी कोशिश करने वालो का साथ देते हैं। सो भगवान ने उसका साथ दिया।

एक बड़ी कंपनी का बड़ा इंजीनियर था वो। चटखते फूल की किस्मत यूँ बुलंद थी कि उस इंजीनियर ने उसी केम्पस में ठिकाना किया जहाँ वो तथाकथित वो खूबसूरत लड़की रहती थी।

लड़की ने जांचा – परखा और उस धीरज नाम के इंजीनियर पे अपना पैंतरा चला दिया। धीरज जवान था। उसके पास पैसा था। अच्छी नौकरी थी। बस कमी थी तो एक अदद सुन्दर प्रेमिका की। लड़की और लड़के के नैन मिले। होठं मिले। और फिर गोरखपुर के होटल में जिस्म मिले। लड़का खूबसूरत प्रेयसी पाके निहाल हो गया। और लड़की पैसे वाला प्रेमी पाके मचल उठी।

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कहते हैं, लड़की जब मचलती है तो मनचलों के मन भी मचलने लगते हैं।

उस लड़की के साथ भी ऐसा हुआ। लड़की ठहरी खिलता फूल वो भी महक से तरबतर। उसे अपनी महक लुटाने में कोई कमी नज़र नहीं आई। जितना लुटाती वो उतना ही महक उठती।

मनचलों में एक था ‘सौम्या के सर’। सौम्या उसके कज़िन की लड़की थी जिसे ट्यूशन पढ़ाने ‘सौम्या के सर’ आते थे। दूसरा मनचला था एक कालेज का प्रौढ़ प्रिनिसिपल। आखिर लड़की किसी अनुभवी के साथ का अनुभव भी बटोर लेना चाहती थी।

और भी मनचलों के मन लड़की की बतख चाल पे लट्टू हुए होंगे। नाचे होंगे। पर हमारे ज्ञान के दायरे से वो परे की चीज़ रहे।

लड़की जब कमल से मिलती तो धीरज से बहाने बाजी। और जब धीरज से मिलती तो कमल से बहाने बाजी। कहते हैं लड़कियों के पास आंसू नाम के वो हथियार हैं जिससे वो संसार के सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्ति को भी हरा सकती हैं। लड़की ने अपनी ताक़त को पहचाना और विजय पे विजय हासिल करती रही।

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कहते हैं, वक़्त राज खोल देता है।

धीरज ने कहा वो कमल से न मिले। लड़की ने न नुकुर के बाद मान लिया। आखिर उसे उच्चशिक्षा के लिए मार्ग पे जो चलना था। लड़की ने धीरज से कहा उसका एडमिशन M.B.A. में करा दो दिल्ली में। मैं खुद – ब – खुद कमल से दूर हो हो जाउंगी।

धीरज प्यार करता था लड़की से। फिर क्योंकर न मानता वो अपनी प्रेयसी की बात। लड़की दिल्ली पहुँच गई। बड़ा शहर। बड़ा कालेज। लड़की के पंख लग गए। वो आसमान में उड़ चली।

धीरज मुंबई चला गया। कंपनी ने तबादला कर दिया। वैसे भी वो गोरखपुर में अब क्या करता। उसकी प्रेयसी तो अब दिल्ली में थी उच्च शिक्षा के लिए। धीरज अपनी प्रेयसी की पढ़ाई डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था सो वो दिल्ली कभी – कभी ही गया। हाँ फोन पर वो अपनी प्रेयसी से जरूर रोज बात करता। धीरज बिना किसी व्यवधान के लड़की के लिए पैसा भेजता। लड़की की जरुरत से कहीं ज्यादा। वो लड़की से प्यार जो करता था। सच्चा प्यार ।

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लड़की M.B.A. कर चुकी थी। जॉब भी लगी थी।

अब शायद उसे धीरज की जरुरत नहीं थी। उसे जय नाम का मनचला मिल चूका था। अच्छा – खासा जॉब। बड़ा घर। लड़की उस से मिली और उसपे अपनी महक लुटा दी । जय उसका दीवाना बन गया । बात शादी तक पहुंची । लड़की फट से राज़ी हो गई। आखिर उसे बचपन में अपनी माँ की कही वो बात – ‘तूँ बड़ी होकर जो अच्छी लड़की बनोगी तो तुम्हें भी एक पति मिलेगा’ – सच जो करनी थी।

पर एक दिन जय ने लड़की के मोबाईल में धीरज का मेसेज देख लिया। प्यार के शब्दों का मेसेज। लड़की तो अब उच्च शिक्षित थी। आंसू के हथियार तो साथ थे ही। दोनों का इस्तेमाल किया। और उसने जय के सामने धीरज का वो खाका खींचा कि जय का प्यार उस लड़की पे और गाढ़ा हो गया।

लड़की ने धीरज का जो खाका खींचा वो कुछ यूँ था — धीरज उसे तंग करता है। फोन करके परेशान करता है। उसकी ज़िन्दगी नरक बना चूका है। से गाली देता है। और उसे मरता – पीटता है।

जय ने लड़की लड़की से कहा – ‘ठीक है यही एक बार मेरे सामने धीरज से कहो। उसे ज़लील करो।’ लड़की ने सोचा उसे अब धीरज की जरुरत तो नहीं। सो वो जय की बात मान गई।

लड़की ने धीरज को जी भर जय के सामने ज़लील किया। धीरज चुचाप सुनता रहा। और वहां से चला गया। बिना कुछ कहे। वो लड़की से प्यार जो करता था। सच्चा प्यार।

धीरज को लड़की के मम्मी और भाई भी जानते थे। धीरज ने उन्हें अपना माना था। उनकी मदद की थी। लड़की के भाई को पढ़ाया था। B.C.A.करवाया था।

लड़की की मम्मी ने खुश होकर धीरज को फोन किया। लड़की की शादी की बात बताई। और दहेज़ के लिए उसकी सहयता मांगी। धीरज तयार हो गया। वो लड़की से प्यार जो करता था। सच्चा प्यार।

धीरज ने एक बड़ी रक़म लड़की की मम्मी के एकाउंट में डाल दी। लड़की की शादी के दहेज़ के लिए। वो उसे प्यार जो करता था।

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लड़की की इंगेजमेंट हो चुकी थी। शादी की डेट भी फिक्स हो गई। लड़की ने धीरज को इन्फॉर्म नहीं किया। जरुरत ही नहीं थी उसे।

शादी के दो दिन पहले लड़की और उसके करीबी सफर पे निकले। शादी का सफर। बोकारो का रास्ता। जय का शहर जो यही था।

मैं भी सफर में था। मैं लड़की का करीबी जो था। उसके लड़कपन का दोस्त। लड़की ने मुझे देखा। और मुस्करा कर बोली – ‘देखो मेरे पास सब कुछ है। एक पति भी मिलने जा रहा है। मैं अच्छी लड़की जो हूँ। और खूबसूरत भी।’

मैंने देखा तो लड़की मुझे खूबसूरत लगी। मैंने उसकी बात मान जो ली थी।

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लड़की की शादी हो गई।

मुझे अचानक एक लेखक मिल गया। मैंने उसे लड़की की कहानी सुनाई। लेखक ने एक कहानी लिखी। शीर्षक था – ‘खूबसूरत अंजलि उर्फ़ बदसूरत लड़की।’

मैं मान गया लड़की खूबसूरत नहीं थी। ये एक साहित्यकार ने जो कहा था।

लड़की का नाम अंजलि था।

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सुधीर मौर्य
गंज जलालाबाद, उन्नाव
Pin – 209869

एक बेबाक लड़की की कहानी -सुधीर मौर्य

प्रिया ने मुझसे पूछा ये BHMB क्या होता है।

मैने गौर से प्रिया को देखकर कहा ‘नहीं जानता।’ मेरा जवाब सुनकर प्रिया ने कहा ‘उ ऊ ह , तुम कुछ नहीं जानते चलो मै किसी और से पूछ लूंगी।’ कह कर प्रिया जाने लगी तो मैने उसे रोककर कहना चाहा ‘मै इसका जवाब जानता हूँ पर तुम्हे बता नहीं सकता।’
मै सोचता रह गया और वो चली गई। ये मै तब की बात बता रहा हूँ जब प्रिया बमुश्किल बारह की थी और मै तेरह का। हमारी उम्र में भले ही एक साल का फ़र्क़ था पर हमारी कक्षाएं समान थीं। हम दोनों ने ही इस साल आठवी के एग्जाम दिए थे।
अगले दिन जब मै पार्क में मुहल्ले की ही एक लड़की जो तक़रीबन मेरी ही उम्र की रही होगी, उसके साथ बातें कर रहा था तभी वहां प्रिया आ गई। आते ही उसने मुझसे कहा ‘जानते हो BHMB का मतलब होता है बड़े होकर माल बनेगी।’
प्रिया की बात सुनकर मै और मेरे साथ खड़ी लड़की पूजा चुपचाप एक – दूसरे को खड़े होकर देखते रह गए। हमें यूँ चुप देखकर प्रिया अपनी मिनी स्कर्ट को अपने हाथ से पकड़ के लहलहाते हुए बोली ‘कल जब मै मार्केट गई थी तो वहां कुछ लड़कों ने मुझे देखकर BHMB वाला कमेंट किया। सच मै ये सोचकर एक्साइट हूँ कि मै बड़े होकर माल बनुँगी।’
प्रिया की बात पर मै अब भी खामोश था पर पूजा बोली ‘प्रिया, कुछ लड़के तुम पर माल बनने के फ़िक़रे कस रहें है और तुम उनकी शिकायत करने की जगह खुश हो रही हो ?’
‘ओ पूजा तुम कैसी बूढ़ी औरतों की तरह सीख दे रही हो अरे हम बोल्ड लड़कियां है नये ज़माने की और अगर कोई हमें अभी देखकर जान ले कि बड़े होकर बेहद सुन्दर होगें तो इसमें बुरा क्या है ?’
‘प्रिया सुन्दर कहने और माल कहने में फर्क है।’ पूजा ने प्रिया के तर्क़ का जवाब दिया था।
‘अरे यार पूजा छोड़ो ये सब, इसे बेबाकी कहते हैं, मतलब बोल्ड्नेस।’ प्रिया की बात सुनकर पूजा खामोश हो गई। मै तो पहले से ही खामोश था। जबकि प्रिया, वो अपने उभरते शरीर पर अपनी ही नज़र डालकर वहां से चली गई।
प्रिया और पूजा हमउम्र थीं पर मैने महसूस किया कि प्रिया, पूजा से कही जल्दी जवान हो रही थी। प्रिया के बात करने का अंदाज़ बेहद बोल्ड था और वो बात – बात पे खुद को बेबाक लड़की साबित करने की कोशिश किया करती थी। वो कभी – कभी मेरे पास आती और कोई सेमी नॉन वेज जोक सुना देती। मै जब कोई जवाब नहीं दे पाता तो वो मेरे सामने रखी नोटबुक बंद करते हुए कहती ‘अरे सरफ़रोश क्या हमेशा सड़ी सी कहानियां लिखते रहोगे कभी कोई बोल्ड कहानी लिखो। और फिर कुछ देर बाद बोलती ‘देखना सरफ़रोश मै एक दिन बेबाक कहानियाँ लिखुगी और मेरा नाम पेज थ्री पर होगा। लोग मुझे सेलब्रेटि कहेंगे।
मै दिल से प्रिया के सेलब्रेटी बनने की दुआ करता पर न जाने क्यों मुझे लगता कहीं सेलब्रेटी बनने के लिए उसका चुना रस्ता गलत न हो।’
प्रिया हमारे साथ दंसवी तक थी। उसके बाद वो दूसरे शहर चली गई और फिर कई सालो तक हमें एक – दूसरे की कोई खबर नहीं रही।
राइटिंग मेरा बचपन का शौक था जिसे मैने अपना प्रोफेशन बना लिया। अब मै वॉलीवुड का एक स्थापित लेखक था। मै न सिर्फ वॉलीवुड का लेखक था बल्कि मै साहित्यिक रचनाएं भी लिख रहा था। मेरा एक नवलेट ‘माई लास्ट अफेयर’ उन दिनों बेहद चर्चा में था। उसकी चर्चा न सिर्फ देश के कोने – कोने में हो रही थी बल्कि वो सरहद पार कई देशो में भी चर्चित हो रहा था।
सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक पर प्रिया की फ्रेंड रेकयूस्ट और इनबॉक्स में मैसेज साथ – साथ आया।
प्रिया ने मुझे ‘माई लास्ट अफेयर’ की बधाई देने के साथ उसे पढ़ने की इच्छा व्यक्त की। मैने उसका एड्रेस माँगा और उसे अपनी किताब भेज देने का वादा किया। प्रिया ने कहा वो भी कहानिया लिख रही है। मैने उसे शुभकामनाये दी और उसकी फ्रेंड रिकयूस्ट एक्सेप्ट कर ली।
मैने प्रिय को ‘माई लास्ट अफेयर’ भेज दी थी। हमारे बीच अक़्सर चेटिंग होती और वो अपनी चैटिंग में खुद को बेबाक साबित करने की वालिहना कोशिश करती। उसने अपनी कहानियो की किताब के लिए एक अच्छे प्रकाशक के बारे में पूछा और मैने उसे अपने एक प्रकाशक मित्र का एड्रेस दे दिया।
कुछ दिनों मे प्रिया का कहानी संग्रह प्रकाशित हो कर आ चूका था। मैने चैटबॉक्स में महसूस किया कि वो अपनी इस पुस्तक के प्रकाशन के साथ ही हवा में तैरने लगी थी। उसने मुझसे अपनी पुस्तक पढ़ने की रिक्यूस्ट की और मैने कहा मै जल्द ही उसकी पुस्तक मांगा कर पढूंगा। उसने जब कहा मै उसकी पुस्तक पढ़कर उसकी समीक्षा भी करूँ ओ मैँने उसे शालीनता से ये कह कर मना कर दिया कि मै या तो लेखक हूँ या पाठक कोई समीक्षक नहीं। पर प्रिया ने गुज़रे दिनों की दोस्ती का वास्ता देखकर जब समीक्षा लिखने का दबाव बनाया तो मैने कहा मै जल्द ही उसकी किताब पढ़कर एक टिप्पणी जरूर लिखूंगा। मेरी बात पर प्रिया ने चैटबॉक्स में कई स्माइली भेजे और फिर लिखा देखें सरफ़रोश मेरी बेबाक कहानियो की समीक्षा, आपको एक समीक्षक भी बना देगी।
यक़ीनन समय की व्यस्तता रही होगी मै प्रिया की किताब पढ़ नहीं पाया। प्रिया ने अक्सर चैटबॉक्स में मुझसे टिप्पणी लिखने को कहा और फेसबुक पर पोस्ट हो रही उसकी किताब की समीक्षा के साथ मुझे टैग करना चालू कर दिया।
एक दिन उलझ कर मैने कहा फेसबुक पे समीक्षा कोई भी लिख सकता है। क्या ही अच्छा होगा वो अपनी किताब की समीक्षा किसी प्रतिष्ठित पत्र – पत्रिकायो में प्रकाशित करवाए। मेरे ये कहने के कुछ दिनों बाद ही उसने एक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित अपनी पुस्तक की समीक्षा के साथ मुझे फेसबुक पे टैग किया।
प्रिया की किताब की समीक्षा जिस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी वो देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित पत्रिका थी। यक़ीनन प्रिया की लिखी कहानियां उत्कृष्ट रही होगी तभी तो इतनी नामचीन पत्रिका उनकी समीक्षा प्रकाशित हुई थी। मैने सोचा मै जल्द ही समय निकल कर उसकी किताब पढूंगा। मैने प्रिया को चैटबॉक्स में बधाई भी दी।
जब मैने उसे चैटबॉक्स में बधाई दी तो वो आनलाइन थी उसने तुरंत रिप्लाई दिया सरफरोश मैने कहा था न कि मै एक दिन सेलब्रेटी बनुँगी। जब मैने उससे पूछा क्या उसने पत्रिका कार्यालय में अपनी पुस्तक समीक्षा हेतु भिजवाई थी तो उसने बताया वो खुद पत्रिका कार्यालय में गई थी। और पत्रिका के संपादक एक बेबाक लड़की की बेबाक कहानियो की समीक्षा छापने को तैयार हो गए।
मैने उसे स्माइली भेज कर कहा हाँ वो एक सेलब्रेटी बन है और साथ ही इतनी सुंदर भी कि उसे अब वॉलीवुड का रुख करना चाहिए। मेरी बात सुनकर उसने स्माइली भेजकर कहा रियली सरफ़रोश ? मैने कहा – अफकोर्स।
एक दिन प्रिया ने मुझे फोन करके कहा वो मुंबई में है और मुझसे मिलना चाहती है। मै उसे अपना एड्रेस SMS करूँ। मैने उसे एड्रेस SMS भेजा तो उसने कहा वो आज ही मेरे घर आ रही है और मुझे अपनी बचपन की दोस्त से आज ही मिलना होगा।
प्रिया मेरी बचपन की दोस्त थी उससे मिलने का मै भी ख्वाहिशमंद था पर आज मैने एक अन्य नायिका को समय दे रखा था। ख़ैर मेरे प्रोफेशन में ये आम बात थी। पर समस्या ये थी कि ये नायिका अपने बीते दिनों में पोर्न स्टार रह चुकी थी और अब वॉलीवुड में काम करके अपनी छवि सुधारना चाहती थी। न जाने एक पोर्न स्टार को मेरे साथ देखकर प्रिया क्या सोचेगी ? क्योंकि एक बार गुज़रे ज़माने में प्रिया ने मुझे एक बात पर अच्छा – खासा लेक्चर दिया था।
ये बात उन दिनों की थी जब हम दंसवी में पढ़ रहे थे। पूजा आदवसियो के जीवन के बारे में जानना चाहती थी। हमारे शहर से कुछ मील की दूरी पर कुछ आदिवासी कबीले थे। मै और पूजा अक्सर सन्डे के दिन वहां जाते और उनके रीति – रिवाज़ो का अध्यन करते। पूजा ने मुझे उन आदिवासियों के जीवन पे एक कहानी भी लिखने के लिए कहा।
एक दिन जब मै और पूजा उस आदिवासी कबीले में जा रहे थे तो वहां हमारे साथ प्रिया भी गई उन दिनों तक उस कबीले में स्त्री – पुरुष में कमर के ऊपर वस्त्र पहनने का चलन नहीं था। बस वो कमर पे कपडे का एक छोटा सा टुकड़ा लपेट लेते थे। ख़ैर अब पूजा की अथक मेहनत से उस कबीले का जीवन स्टार काफी हद तक सुधर चूका है। शरीर पे पूरे कपड़ो के साथ – साथ उनकी बस्ती में प्राथमिक अस्प्ताल, स्कूल और बिजली आदि सुविधाएं उन्हें मुहैय्या हो चुकी है। अपने इस काम के लिए पूजा राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी है और आज भी वो लगातार ऐसे उपेक्षित और पिछड़े लोगो के लिए काम कर रही है।
हाँ तो मै कह रहा था रहा था उस दिन प्रिया जब हमारे साथ उस आदिवासी कबीले में गई तो पूजा और मुझपे अश्लील होने का आरोप लगाने लगी। उसने कहा मै उन अर्धनग्न आदिवासियों पे इसलिए कहानी लिख रहा हूँ ताकि कम उम्र में ही मै अश्लीलता के सहारे प्रसिद्धि पा संकू। प्रिया ने पूजा से कहा कि वैसे तो तुम बड़ी बहनजी टाईप लड़की बनती हो और यहाँ आदिवासी औरतों के स्तनों की फोटो खीँच रही हो। मैने और पूजा ने प्रिया को समझाने की कोशिश की, इसमें कोई अश्लीलता बल्कि हम इनके जीवन के बारे में समाज को बताकर इन्हे बाकी समाज से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
पूजा ने भी प्रिया को समझाते हुए कहा – कि उस जैसी बोल्ड लड़की को शोभा नहीं देता कि वो आदिवासियों की गरीबी और परम्पराओ को अश्लील कहे।
पूजा की बात प्रिया वहां से पैर पटक कर ये कहते हुए चली गई कि हम स्टुपिड बेबाकी और अश्लीलता में फ़र्क़ करना नहीं जानते।
आज भी जब इतने दिनों बाद प्रिया मुझसे मिलने आ रही थी तो मेरे साथ सना थी। सना अब पोर्न की दुनिया छोड़कर वॉलीवुड में अपना कैरियर बनाना चाहती थी। यक़ीनन प्रिया मुझ पर सना को लेकर ताना मारने वाली थी – कि मै और सना उसकी अश्लीलता के सहारे वॉलीवुड में नाम कमाना चाहते हैं।
पर उस दिन प्रिया मेरी उम्मीद के विपरीत थी। उसने सना और उसके एक्स कैरियर को जानने के बाद भी फौरी तौर पे कोई टिपण्णी नहीं की। बस अपनी बेबाकी के किस्से सुनाती रही। उसने बीते दिनों का वो किस्सा भी सुनाया जब उसने पूजा के सामने मुझसे EBPD का मतलब पूछा था। जब मै इसका मतलब नहीं बता पाया तो उसने अगले दिन पूजा के सामने मुझे इसका मतलब बताया जिसे सुनकर पूजा शर्म से लाल हो गई थी। .
सना ने प्रिया से पूछा लिया था EBPD का मतलब। जब तक मै सना को पूछने और प्रिया को बताने से रोक पता तब तक प्रिया बोल पड़ी – इरेक्ट भावनाओं पे धोखा।
प्रिया की बात सुनकर सना के चेहरे पे जब तनिक लाज की सुर्खी आई तो प्रिया बोली ‘क्या सना एक पोर्नस्टार होकर भी तुम इस नार्मल बात पे शर्माती हो जबकि मै इसे कितनी सहजता से कह लेती हूँ।’ फिर प्रिया मुझसे मुखातिब होकर बोली ‘सरफ़रोश मुझे लगता है अब आप बेबाकी और अश्लीलता के मायने समझ गए होगे ?’
हाँ क्यों नहीं प्रिया, मै तो उसी दिन समझ गया था जब तुमने मुझे आदिवासी बस्ती में इसके मायने समझाए थे। मेरी बात सुनकर प्रिया काफी देर हंसती रही और फिर वापस मिलने का वादा करके वहां से जाने लगी।
से एक घोस्ट राइटिंग करने वालेजब वो जाने लगी तो सना ने उसे नेक्स्ट सन्डे एक पार्टी में इनवाईट किया जिसे सना ने वॉलीवुड में फिल्म मिलने के एवज़ में रखी थी। प्रिया ने उसका न्योता कबूल करते हुए मुझसे कहा ‘सरफ़रोश अब जबकि तुम कहते हो कि बेहद खूबसूरत हूँ तो क्या आप उस पार्टी में मेरी मदद करोगे ?’
‘कैसी मदद प्रिया ?’
मुझे बतौर नायिका वॉलीवुड में फिल्म दिलाने में।’
‘मै पूरी कोशिश करूँगा।’ मैने कहा था।

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सना की दी हुई पार्टी में वॉलीवुड की तमाम बड़ी हस्तियां थी। मैने इस पार्टी में पूजा को भी बुलाया था पर उसने आखिरी समय में पार्टी में ये कह कर आने से मना कर दिया ‘कि उ शख्स से मिलने जाना है।’
उस पार्टी में प्रिया भी आई थी। स्लीवलेस शार्ट मिडी और हलके लाल कर्ली बालों के साथ। मैने उसका स्वागत सेक्सी और बोल्ड गर्ल करके किया। जिसके बदले में उसने अपने मोती से दांतों से अपने निचले होठ को काट कर शुक्रिया कहा। मैने प्रिया का परिचय वॉलीवुड के कई प्रोडूसर, डायरेक्टर और राईटर से करवाया।
बाद में जब पार्टी अपने शबाब पर पहंची तो मैने प्रिया के हाथ में व्हिस्की का गिलास और उंगलियों में सिगरेट को फंसा हुआ पाया।
वो सिगरट के लगातार कश मार रही थी। पार्टी के शोरगुल के बीच मैने उसके कान में कहा कि एक अभिनेत्री को ज्यादा सिगरेट नहीं पीनी चाहिए। मेरी बात का काउंटर रिप्लाई देते हुए उसने कहा ‘सरफरोश जब कोई मर्द सिगरेट पीता है तब भी क्या आप उसे समझाते हैं। सच तो ये है कि आप मर्दों को लड़कियों की बेबाकी पसंद नहीं आती। वैसे बाय द वे मैने समझा आप मेरा चुम्बन लेने वाले है बट आप तो मुझे ज्ञान देने लगे।
मेरे पास हर बार की तरह प्रिया की बात का कोई जवाब इस बार भी नहीं था और सच कहूं तो उसने चुम्बन वाली बात कहके खुद के बेबाक होने का सबूत भी दे दिया था।
उस पार्टी के दो – तीन दिन बाद प्रिया ने मुझे फोन करके कहा उसे एक डायरेक्टर ने स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया है और मुझे भी वहां आना है। मैने प्रिया को बधाई दी और वहां न आने पाने की क्षमायाचना करते हुए कहा ‘मुझे कल सुबह की फ्लाइट से दिल्ली जाना है एक साहित्यिक समारोह में सम्मिलित होने के लिए।
उस दिन दिल्ली मे मुझे प्रिया के बारे में दो बाते मालुम पड़ी।
एक – प्रिया ने शाम को मुझे फोन करके कहा ‘कि वो स्क्रीन टेस्ट में फेल हो गई है।’ मैने उसे सांत्वना तो दी पर उसे ज्यादा अच्छे से सांत्वना नहीं दे सका क्योंकि दिन को साहित्यिक समारोह की एक घटना ने मेरा मन प्रिया के लिए थोड़ा कसैला कर दिया था।
साहित्य समारोह में उस पत्रिका के संपादक महोदय से भेंट हो गई जिस पत्रिका में प्रिया की किताब की समीक्षा छपी थी। चर्चा के दौरान उन्होंने कहा आजकल पत्रिकाओं का स्टार गिरता जा रहा है। फिर तुरंत ही उन्होंने अपनी पत्रिका का उदहारण दे डाला। वे प्रिया की किताब की छपी समीक्षा से दुखी थे।
मैने कहा ‘श्रीमान आप संपादक हैं और यक़ीनन ठोक – बजा कर ही आपने उस किताब की समीक्षा करवाई होगी। फिर आपके चेहरे पे ये दुःख और पश्चाताप की परछाई क्यों ?’
मेरी बात सुनकर संपादक महोदय बोले ‘आप तो प्रिया को जानते हैं क्या वो काफी बोल्ड है ?’
‘हाँ है।’ मैने छोटा सा जवाब दिया।
‘और खूबसूरत भी ?’ उन्होंने पूछा।
‘हाँ।’ मेरे इस छोटे से जवाब पे वे हाथ से एक तरफ खड़े युवक की ओर इशारा करते हुए बोले वो अमित है और उसने प्रिया की बोल्ड्नेस से प्रभावित होकर वो समीक्षा छपवाई है।’
‘मतलब ?’ मै सच में कुछ नहीं समझा था और मुझे समझाते हुए संपादक महोदय बोले ‘उस वक़्त में अस्वस्थ था और इस वजह से हमारी पत्रिका के उस अंक के संपादन की ज़िम्मेदारी इस लड़के अमित पे थी।’
‘तो ?’ मेरी जिज्ञासा बढ़ गई थी।
मेरी जिज्ञासा शांत करते हुए संपादक महोदय बोले ‘प्रिया ने अपनी बेबाकी अमित के गाल पे अपने होठों से उड़ेली और बदले में अमित ने वो समीक्षा मंजरे आम की।’
–संपादक महोदय की बात सुनकर मुझे झटका लगा, मे उन्हें अविश्वास से तकता रहा और मुझे यूँ ही अविश्वाश में झूलता छोड़कर वे वहां से चले गए।

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जब मै दिल्ली से मुंबई आया तो मेरा मन प्रिया के लिए बहुत कसेला था। यही वजह थी मैने उससे कांटेक्ट नहीं किया और न ही उसने मुझे कांटेक्ट किया।
कोई दो – तीन महीने बाद प्रिया ने मुझे फोन करके अपनी ख़ुशी बांटी, उसे एक फिल्म में बतौर सहनायिका रोल मिल गया है। उसने एक पार्टी रखी थी और उसमे मुझे इनवाईट किया ।
पिछले कुछ दिनों से मेरा मन प्रिया के लिए कसेला था, पर वो मेरी दोस्त थी। इसलिए मैने उसका न्योता कबूल कर लिया।
उस पार्टी में फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियों के साथ सना भी थी। सना की फिल्म की शूटिंग अंतिम चरण में थी। मै उसकी सफलता के लिए जब उसे बधाई दे रहा था तब प्रिया ने वहां आकर कहा ‘सरफ़रोश देखना एक दिन मै किसी फिल्म में नायिका बनुँगी और उस फिल्म की सहनायिका सना होगी।’
प्रिया की बात सुनकर सना ने उसे शुभकामना देते हुए उसकी ओर हाथ बढ़ा कर कहा ‘मुझे आपके साथ काम करके अच्छा लगेगा।’ पर प्रिया सना के हाथ की और हिकारत से देखते हुए बोली ‘मै किसी पोर्न स्टार से हाथ मिलाना पसंद नहीं करती।’
प्रिया की बात सुनकर संना को शदीद झटका लगा और वो ज़मीन की ओर तकने लगी। सना को हौसला देने के लिए मैने उसके कंधे पे अपने हाथ रख दिए। मुझे यूँ सना के कंधे पे हाथ रखे देखकर प्रिय कटाक्ष से बोली ‘डोंट वरी सना, तुम्हारे गॉड फादर तुम्हारे साथ है।’
कह कर प्रिया वहां से चली गई और सना के आँख के आंसू उसके गाल पे ढलक गए। उसके आंसू अपनी हथेलियों में ज़ज्ब करते हुए मैने ‘सना मै तुमसे प्यार करता हूँ। क्या मुझसे शादी करोगी ?’
‘जबकि आप जानते हैं, मै पोर्नस्टार हूँ।’ सना मुझे अविश्वास से देख रही थी।
‘और जबकि मै ये भी जानता हूँ किस मज़बूरी के वश में होकर तुम ये राह चली हो। और मै ये प्रपोस किसी पोर्नस्टार को नहीं बल्कि वॉलीवुड स्टार से कर रहा हूँ। मुझे जवाब चाहिए सना।’
पर ये दुनिया तुम्हे ताने दे दे कर जीने नहीं देगी।’ सना की नज़र प्रिया की ओर थी।
‘और जबकि आम्रपाली पवित्र होकर आज एक देवी बन चुकी है तो फिर मुझे अवसर दो कि मै तुम्हे अपने प्रेम से देवी बना सकूँ।’
मेरी बात सुनकर सना लजा गई और फिर वो तमाम पार्टी में लजाती रही। सना को यूँ लजाते हुए देखना मुझे बेहद अच्छा लग रहा था बस इसलिए मै उसे तनहा छोड़कर उसे दूर से देख रहा था। मुझे यूँ अकेला छोड़कर उस फिल्म का डायरेक्टर वहां आ गया जो प्रिया की फिल्म को डायरेक्ट कर रहा था।
उससे हाथ मिलाते हुए मैने कहा ‘सर इंसान हो तो आपकी तरह न्यू कमर को इतना इनकरेज करने वाला।’
‘क्या कहना चाहते हो सरफ़रोश मै कुछ समझा नहीं ?’ डायरेक्टर महोदय ने अकबका के मुझे देखा।
‘यही सर कि जबकि प्रिया स्क्रीन टेस्ट में बतौर नायिका फैल हो गई तो आपने उसे सहनायिका का रोल देकर इनकरेज किया। ‘
‘अरे नहीं लेखक महोदय।’ वो डायरेक्टर मेरे तनिक नज़दीक आकर बोल ‘मैने तो उसे टोटली रिजेक्ट कर दिया था बट प्रोडयसर साहब पर न जाने उसने क्या जादू किया और उन्होंने मुझे प्रिया को फिल्म में लेने को कहा।’
उस डायरेक्टर की बात सुनने के बाद मैने प्रिया को पार्टी में तलाशा तो उसे उसकी फिल्म के प्रोडयसर के साथ हँसते – इठलाते पाया। मै मन ही मन मुस्करया तो प्रिया ने यहाँ भी अपनी कथित बेबाकी का इस्तेमाल किया।
हालाँकि वो पार्टी प्रिया की थी फिर भी मैने उस पार्टी में अपनी और सना की शादी की घोषणा कर दी। वहां मौजूद हर शख्स से मुझे ढेरो बधाइयां मिली। पर प्रिया मुझे जलती निगाहो से देखती रही। और फिर जब मै तनिक तनहा था तब वो मेरे पास आकर बोली ‘सरफ़रोश आइडिया है आपका एक पोर्नस्टार के सहारे मशहूर हो जाने का। फिर वो तनिक नज़रे नीची करके बोली ‘वैसे हम भी आपके तलबगार थे।’
मै प्रिया की बात का कोई जवाब दे पता तभी वहां सना आ गई और मुझे अपने साथ पार्टी से बाहर ले आई।

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उस पार्टी के बाद फिर प्रिया मुझे काफी दिन नहीं मिली, मैने अंदाजा लगाया वो अपनी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त होगी। एक दिन पूजा अचानक घर आ गई। सना के साथ शादी के मेरे फैसले को समाज की बड़ी जीत बताते हुए वो मुझे ढेरो शुभकानाए देने के बाद बोली ‘सरफ़रोश क्या आप घोस्ट राइटिंग करने वाले किसी इंसान की स्टोरी लिखना चाहोगे ?’
मेरे हाँ कहने पे पूजा ने अगले दिन मुझे एक लड़के से मिलवाया।जब मैने उससे पूछा उसे बड़ा दुःख होता होगा जब उसकी लिखी रचना उसके सामने किसी और के नाम से आती होगी ? तो उसने कहा जरुरी नहीं कि हर बार घोस्ट राइटिंग करके तकलीफ ही हो।
‘तो क्या तुमने कभी ख़ुशी भी महसूस की है घोस्ट राइटिंग करके ?’
‘हाँ एक बार एक लड़की जो किसी कीमत पर लेखिका बनना चाहती थी उसके लिए मैने कहानियो की एक किताब लिखी और बदले में उसने मुझे अपनी एक रात दी।’ पूजा से नज़रे चुराकर वो लड़का आगे बोल ‘सर मेरी घोस्ट राइटिंग का वो सबसे सुखद पल था।’
फिर उसने अपने बैग एक किताब निकाल कर हमारे सामने टेबल पर रखते हुए कहा ‘और सर ये ख़ुशी तब और बढ़ जाती है जब वो किताब बेस्ट सेलर कहलाए।’
मेरी और पूजा की नज़र जो ही किताब पे पड़ी हम दोनों ही आश्चर्य से उछल पड़े। हम दोनों ही प्रिया को उस किताब की लेखिका के बारे में अब तक बखूबी जानते आये थे।
जब वो लड़का अपनी बाकी दास्ताँ सुनाके चला गया तो पूजा ने मुझसे पूछा ‘क्या आप इस पर कहानी लिखेंगे ?’
‘नहीं कहानी नहीं, मै एक डाक्यूमेंट्री बनाना चाहूंगा जिसमे न सिर्फ इस लड़के की दास्ताँ हो बल्कि और भी कई वो किरदार हो जो अपना असली चेहरा छिपाए रहते है , क्या तुम मेरी हेल्प करोगी पूजा इस काम में ?’
मेरी बात पे पूजा ने इक़रार में सर हिलाया था।
काफी समय बाद प्रिया मुझे एक फंकशन में मिली, पूछा – ‘आजकल क्या लिख रहे हो ?’
‘लिख नहीं बना रहा हूँ।’
‘ओह क्या मूवी ?’
‘नहीं, डाक्यूमेंट्री।’
‘ओ नायस, किस पर ?’
‘तुम पर।’
‘रियली।’ प्रिया ख़ुशी से उछलते हुए बोली ‘मै जानती थी एक दिन दुनिया मुझपे किस्से – कहानिया लिखेगी, मूवी – डाक्यूमेंट्री बनाएगी। पर सरफ़रोश मै ये नहीं जानती थी आप मुझे इम्प्रेस करने के लिए एक दिन ये सब करगे।’
‘वैसे डाक्यूमेंटी का नाम क्या है ?
‘एक बेबाक लड़की की अश्लील कहानी।’ मैने धीरे से कहा और प्रिया के होठों की हँसी सिकुड़ के उसके अर्धनग्न सीने के बीच में दब गई।

सुधीर मौर्य

देवल देवी: एक संघर्षगाथा (ऐतिहासिक उपन्यास) – सुधीर मौर्य

देवल देवी: एक  संघर्षगाथा,  मेरा ऐतिहासिक उपन्यास  जिसे मैने समर्पित किया है पाकिस्तान की  लड़की रिंकल कुमारी को। सनद रहे २४ फरवरी २०१२ को रिंकल को अगुवा करके उसका  रेप करके उसका जबरन धर्म परिवर्तन किया गया। बाद में उसका निकाह उसके ही अपहरणकर्ता के साथ कर दिया गया। रिंकल ने बहादुरी के साथ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक आवाज़ उठाई पर कट्टरपंथियों के  देश में उसकी एक न सुनी गई और  भी अपने अपहरणकर्ताओ के चंगुल में है। ठीक ऐसी ही  कहानी  आज  से आठ सौ साल पहले  राजकुमारी देवलदेवी के साथ हुई थी पर देवल देवी ने अपनी कूटनीति से अपने अपहरणकर्ताओ के वंश का नाश कर दिया। मैने इस उपन्यास में इसी स्फूर्तिदायक कहानी का उल्लेख किया है। —सुधीर मौर्य            Deval Devi by Sudheer Maurya

मुज़फ्फरनगर से उठते धुंवे के सवाल – सुधीर मौर्य

मुज़फ्फरनगर के दंगो की आंच की आंच में सवाल मुह बायं खड़े हैं। ऐसे सवाल जिनके जवाब हमें अब हर कीमत पे तलाशने होंगे। muzaffarnagarऐसे सवाल जो रूहों को भी बेचैन कर रहे हैं, ऐसे सवाल जो हर वक़्त अंतर्मन को कचोटते रहते हैं। क्या अपनी मां – बहनों की अस्मत की रक्षा करना गुनाह है? अगर गुनाह है तो क्यों है। क्या सिर्फ इसलिए हमारे पास हमारी माँ – बहनों की अस्मत बचाने का हक नहीं है क्योंकि हम हिन्दू हैं। अगर अपनी माँ – बहनों की अस्मत बचाना गुनाह है तो फिर राणा प्रताप और शिवाजी जैसे महान व्यक्ति भी गुनाहगार हुए। खैर हमारे वामपंथी लेखक तो उनके बारे में वैसे ही अच्छी धारणा नहीं रखते। उन्हें तो कामुक अकबर में ही नायक के सरे गुण नज़र आतें हैं। मुज़फ्फरनगर के दो वीर बलिदानी भाइयों ने को शत शत नमन जिन्होंने अपनी बहन के साथ हुई छेड़छाड़ के लिए आवाज़ बुलंद की। अपनी बहन की शीलरक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राणों का उतसर्ग कर दिया, उन्होंने दिखा दिया अभी भी हिन्दू युवाओं का रक्त लाल है और वह अस्मत के लुटेरों की नाक में नकेल कसने की सामर्थ्य रखतें है। उन दो वीर युवाओं का में शत – शत वंदन करता हूँ और उनके प्राणों की रक्षा न कर पाने वाली उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार की निंदा करता हूँ। सरकारी ज़मीन पर जब अवेध मस्जिद की हो रही तामीर को एक ईमानदार अफसर ने रोकना चाहा तो तत्परता दिखाते हुए उसे अखिलेश सरकार ने तुरंत बर्खास्त कर दिया। पर दुर्गाशक्ति नागपाल का कसूर क्या था? बस यही की उसने हो रहे अवेध निर्माण को रोक दिया। या फिर ये की उसने एक “मस्जिद” का निर्माण रोका जो की अवेध थी। एक अवेध मस्जिद के हो रहे निर्माण को रोकना अगर अखिलेश सरकार की नज़र में गुनाह है तो अखिलेश हा सरकार ही सबसे बड़ी गुनाहगार है न की दुर्गाशक्ति नागपाल। कवँल भारती का दोष क्या था? सिर्फ इतना की उन्होंने दुर्गा के साथ हुए अन्याय की विरुद्ध आवाज़ उठाई थी और अखिलेश सरकार की तत्परता देखिये अन्याय के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करने वाले साहित्यकार को उसने तुरंत हिरासत में ले लिया। काश अखिलेश सरकार इतनी का प्रदर्शन ज़रायमपेशा लोगो के विरुद्ध करती। अयोध्या को छावनी में सिर्फ इसलिए तब्दील कर दिया गया क्योंकि वहां कुछ भक्त अपनी धार्मिक यात्रा करने वाले थे पर उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया। यह घटना ये साबित करती है की उत्तर प्रदेश के हिन्दू अब भी मध्यकालीन भारत में जी रहें हैं जहाँ उनसे उनके धार्मिक अनुष्ठान के लिए ज़जिया वसुला जाता था। सवाल ये उठता है ऐसे मोकों पर सजग और तत्पर दिखने वाली अखिलेश सरकार दंगे के वक़्त सोती क्यों रह जाती है कहीं ये वो जानबूझकर तो नहीं करती? अगर ये जानबूझकर होता है तो किन्हें खुश करने के लिए? खैर अखिलेश सरकार के इन कृत्यों के लिए उन्हें वक़्त और जनता सबक सिखायगी। हम तो उन दो वीर भाइयों को श्रधांजली अर्पित करते हैं जिन्होंने अपनी बहन की शीलरक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। –सुधीर मौर्य

पाक की नापाक हरकतों का जवाब देने की वजहे – सुधीर मौर्य

पाकिस्तान के अवामी लीग के नेता का भारत को धमकी देना, उनका कहना की अगर भारत ने जंग छेड़ी तो फिर ना तो भारत के मंदिरों में कभी घंटियाँ बजेंगी और ना ही वहाँ (भारत) के मैदानों में कभी घास उगेगी। उनकी नापाक फितरत की सोच है। भारत को यकीनन उनके इस वक्तव्य को गंभीरता से लेना चाहिए। इतिहास गवाह है मुस्लिम सेनाओं ने इसी तरह के अपवित्र उदॆशय को लेकर हम पर कई हमले किये और कुछ काल के लिए उन्होंने अपनी धूर्तता से हमे हरा भी दिया। पर मंदिरों में घंटियाँ सतत बजती रहीं और भारत के मैदान घास से ही नहीं वरन फसलों से भी लहलहाते रहें। पाकिस्तान अपने नापाक उद्देश्य में कभी कामयाब नहीं होगा, इसका हमें यकीन है पर फिर भी उसके नेता की इस धमकी को कोरी धमकी न मान कर भारत को दुष्ट पकिस्तान की नाक में नकेल तुरंत कसनी ही चाहिए, उसे छठी का दूध याद दिलाना ही चाहिए। असल में तो भारत को पाकिस्तान की इस धमकी पर इस्लामाबाद में अपनी सेना भेजकर उचित प्रतुत्तर देना चाहिए था । सरहद पर घात लगाकर पाकिस्तानी सैनिक, भारतीय सैनिको की कायरतापूर्वक हत्या कर रह हैं, उनके सर काट रहे हैं। इन हालातों में भारत को डंके की चोट पर पाकिस्तान में घुसकर उसकी नापाक करतूतों के लिए उसे फ़ौरन सबक सिखाना चाहिए। पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओ पर अत्याचार दिनोदिन बढते जा रहें हैं। उनकी लड़कियों को जबरन उठाकर मुस्लिम बनाया जा रहा है, उनका बलात्कार किया जा रहा है। उन्हें जबरन मुस्लिम मर्दों की रखेल/बीवी बनाया जा रहा है। कट्टरपंथियों की इन हरकतों पर वहां की सरकार और न्यायपालिका आँखे मूंद कर बैठी है। पिछले साल एक हिन्दू लड़की रिंकल कुमारी को जबरन उठाकर उसके साथ बलात्कार किया गया और उसे उसकी बिना मर्ज़ी के मुस्लिम बना कर एक मुस्लिम गुंडे की बीवी/रखेल बना दिया गया। रिंकल वहां की सुप्रीम कोर्ट में चीख – चीख कर कहती रही की वो अपने मां – बाप के पास जाना चाहती है, उसे जबरन मुस्लिम बनाया जा रहा है पर वहां के चीफ जस्टिस ने भी उसकी आवाज़ नहीं सुनी और उसे बलात्कारियों के हाथों में सौंप दिया। जहाँ वो नारकीय जीवन जीने को आज भी मजबूर है। रिंकल तो एक बानगी भर है ऐसी कितनी ही हिन्दू लड़कियां का वहां जबरन बलात्कार किया जा रहा है उसका कुछ हिसाब नहीं है। पाकिस्तान की इन हरकतों अब भारत को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए। उस पर हमला करके उसकी धूर्तता की उचित – उचित सजा देनी चाहिए। रिंकल, सरहद पर मरते भारतीय सैनिकों की आत्मायो के साथ न्याय होगा जब अब पाकिस्तान में भारतीय सैनिकों के बूटों का संगीत गूंजेगा। – सुधीर मौर्य ‘सुधीर’ गंज जलालाबाद, उन्नाव – २ ० ९ ८ ६ ९

ओह मेरे देश !मुझे चकित करते हो तुम – सुधीर मौर्य

Sudheer Maurya
=============

ओह

मेरे देश !
मुझे चकित करते हो तुम
जब देखता हूँ में
नरपिशाच, हत्यारे और कामुक
अफज़ल की मजार पर
सर और घुटने देखते लोगो को
जिसे मारा था
वीर शिवाजी ने
देश और धर्म की रक्षा के लिए।
ओह

 

मेरे देश !
मुझे चकित करते हो तुम
जब देखता हूँ में
देश की राजधानी में
औरंगजेब रोड को
वो औरंगजेब जिसने
बहाई थी
अकारण ही देश में रक्त की नदिया।
ओह

 

मेरे देश !
मुझे चकित करते हो तुम
जब देखता हूँ में
अपने ही देश के लोगो को
अपने ही देश में
शरणार्थी होते।
ओह

 

मेरे देश !
मुझे चकित करते हो तुम
(मेरी एक कविता का अंश )
—सुधीर मौर्य

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